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डॉ राजेंद्र प्रसाद जीवनी हिंदी में – Rajendra Prasad Biography In Hindi


डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे. उस संविधान सभा के अध्यक्ष थे, जिसने संविधान की रुपरेखा तैयार की. उन्होंने कुछ समय के लिए स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में केन्द्रीय मंत्री के रूप में भी सेवा की थी.

राजेन्द्र प्रसाद गांधीजी के मुख्य शिष्यों में से एक थे और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर, 1884 को बिहार के सिवान जिले के जीरादेई गाँव में हुआ था. उनके पिटा का नाम महादेव सहाय और माता का नाम कमलेश्वरी देवी था. अक्टूबर 1920 में उनका विवाह कांग्रेसी नेता ब्रजकिशोर प्रसाद की पुत्री प्रभावती देवी से हुआ. उन दिनों जयप्रकाश पटना कॉलेज से आईएससी कर रहे थे. लेकिन गांधीजी के आर्ह्रान पर उन्होंने असहयोग आन्दोलन में भाग लेते हुए परीक्षा छोड़ दी.

गांधीजीके संपर्क में आने के बाद वह आजादी की लड़ाई में पूरी तरह से शामिल हो गए. उन्होंने असहयोग आन्दोलन में सक्रीय रूप से भाग लिया. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 1930 में नमक सत्याग्रह में भाग लेने के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया. 15 जनवरी, 1934 को जब बिहार में एक विनाशकारी भूकंप आया तब वह जेल में थे. जेल से रिहा होने के दो दिन बाद ही राजेन्द्र प्रसाद धन जुटाने और राहत के कार्यों में लग गए. वायसराय की तरफ से भी इस आपदा के लिए धन एकत्रित किया गया. राजेन्द्र प्रसाद ने तब तक तीस लाख अस्सी हजार रुपए की राशि एकत्रित कर ली थी और वायसराय इस राशि का केवल एक-तिहाई हिस्सा ही जुटा पाए. राहत का कार्य जिस तरह से व्यवस्थित किया गया था उसने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के कौशल को साबित किया. इसके तुरत बाद डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन के लिए अध्यक्ष चुना गया. उन्हें 1939 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया.

जुलाई 1946 को जब संविधान सभा को भारत के संविधान के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई. तब डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया गया. आजादी के ढाई साल बाद 26 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत का संविधान लागू किया गया और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में चुना गया. राष्ट्रपति के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग उन्होंने काफी सुझबुझ से किया और दूसरों के लिए एक नई मिशाल कायम की. राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने मित्रता बढाने के इरादे से कई देशो का दौरा किया और नए रिश्ते स्थापित करने की मांग की. राष्ट्रपति के रूप में 12 साल के कार्यकाल के बाद वर्ष 1962 में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ में सम्मानित किया गया. सेवानिवृत्ति के बाद अपने जीवन के कुछ महीने उन्होंने पटना के सदाकत आश्रम में बिताएं. 28 फरवरी, 1963 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का देहंद हो गया.


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